livein ganeshavoice.in जाने Live-in-Relationship के फायदे और नुकसान, कुंडली में कैसे देखें
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जाने Live-in-Relationship के फायदे और नुकसान, कुंडली में कैसे देखें

आजकल युवा वर्ग की सोच बदल रही है खासकर live-in-relationship के विषय को लेकर I अपने जीवन में कैरियर को प्राथमिकता देते हुए शादी जैसे विषय में नहीं सोच पा रहे है I या उनको अभी जीवन में आगे बढ़ने के अवसर तलाशने है , ऊँचाइयों पर जाना है I और इन्ही सब के चलते वो शादी जैसे संस्कार को दरकिनार कर देते है I अभी जिम्मेदारी उठाने में सक्षम नही है ऐसा कहते हुए लिव-इन रिलेशनशिप की और बढ़ रहे है I  इस लिव-इन रिलेशनशिप में दोनों व्यक्ति साथ रहते हुए स्वतंत्र जीवन बिताते है I लिव-इन-रिलेशनशिप में एक शादीशुदा कपल की तरह रह रहे हैं,  साथ सो रहे हैं,  साथ खा रहे हैं I लेकिन किसी का किसी के ऊपर कोई दबाव नही है I अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है I

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आजकल लोग लिव-इन-रिलेशनशिप में रहते हैं। मतलब शादी से पहले एक-दूसरे को जानते हैं, समझते है और अगर लगता है की अब शादी करके जीवन साथ में बिता सकते है तो शादी करके या बिना शादी के जिंदगी साथ में बिताते हैं,  नहीं तो अलग हो जाते हैं।

यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें दो लोग जिनका विवाह नहीं हुआ है, साथ रहते हैं और एक पति-पत्नी की तरह आपस में शारिरिक सम्बन्ध बनाते हैं। यह सम्बंध स्नेहात्मक होता है और रिश्ता गहरा होता है। सम्बन्ध कई बार लम्बे समय तक चल सकते हैं या फिर स्थाई भी हो सकते हैं।

लेकिन इस लिव-इन-रिलेशनशिप के क्या लाभ है और क्या नुक्सान है इसको जानना भी बेहद जरुरी है I इसी के आधार पर अगर लिव-इन-रिलेशनशिप का निर्णय करेंगे ती जीवन जीने में बहुत आसानी होगी I

लिव-इन-रिलेशनशिप के लाभ

लिव-इन-रिलेशनशिप में अपने पार्टनर के साथ ज्यादा समय बिताने के कारन उसको जानने में बहुत आसानी हो जाती है I पार्टनर की क्या पसंद है क्या नापसंद है, रूटीन लाइफ किस तरह की है, नेचर किस प्रकार की है I

दोनों पार्टनर अपने हिसाब से अपना जीवन जीते है I आर्थिक रूप से स्वतंत्र होते है I अपने हिसाब से अपने खर्चे करते है I जिसके लिए दोनों में से किसी को भी एक दुसरे को कोई जवाब नहीं देना होता है I

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लिव-इन-रिलेशनशिप में दोनों पार्टनर सामाजिक और पारिवारिक नियमो से स्वतंत्र होते है I उन पर समाज के और परिवार के जैसे कोई नियम लागू नही होते है I वो इन सबसे हटके जीवन का आनंद लेते है I ना समाज की कोई बंदिश और न परिवार का कोई दबाव I

वैवाहिक जीवन से सम्बंधित एक दुसरे के प्रति जो भी जिम्मेदारियां होती है उनसे भी दोनों पार्टनर पूर्णत मुक्त होते है I एक दुसरे को कोई सफाई या जवाबदारी नहीं देनी होती है I

दोनों पार्टनर एक दुसरे का सम्मान करते है क्यूंकि दोनों की एक दुसरे पर कोई जिम्मेदारी नही होती है I दोनों अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है I

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अगर लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने के बाद ऐसा लगता है की दोनों पार्टनर आगे का जीवन सस्थ में नहीं बिता सकते है या फिर उनके विचार आपस में नहीं मिलते है तो दोनों पार्टनर बिना किसी क़ानूनी कार्यवाही के स्वेच्छा से अलग हो जाते है I ओए लिव-इन-रिलेशनशिप का सम्बन्ध समाप्त कर दिया जाता है I

लिव इन रिलेशनशिप में रहने पर अधिकतर कपल्स धोखा और बेवफाई से बेफिक्र रहते हैं।

लिव-इन-रिलेशनशिप के नुक्सान

लिव-इन-रिलेशनशिप का सबसे बड़ा नुक्सान ये है इस रिश्ते को समाज में अच्छी नज़र से नही देखा जाता है I समाज इसको स्वीकार नहीं करता है I ऐसे लोगो का जो लिव-इन-रिलेशनशिप में रहते है उपेक्षित नजरो से देखा जाता है I तिरस्कार की भावना का सामना करना पड़ता है I

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दोनों में से किसी एक साथी को अक्सर टूटे दिल का दर्द सहना पड़ सकता है। लिव-इन-रिलेशनशिप में एक प्रकार के स्थायित्व का भाव होता है I  स्थिरता नही होती है इस रिश्ते में I जिस प्रकार शादी के बाद दोनों पार्टनर को जीवन साथ बिताना होता है चाहे कुछ भी हो, थोडा एडजस्टमेंट करना पड़ता है I विवाह के संबंधो को जीवन पर्यंत निभाने के लिए आपसी सुझबुझ से निर्णय लेने होते है I परन्तु लिव-इन-रिलेशनशिप में इस प्रकार का कोई सामंजस्य नहीं देखा जाता है I जिस कारण स्थिरता नही आ पाती है रिश्ते में I

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विवाह् के पवित्र बंधन में बंधने से एक दुसरे के प्रति आदर सम्मान की भावना का विकास होता है I एक दुसरे की फीलिंग्स का भावना का सम्मान होता है परन्तु लिव-इन-रिलेशनशिप इस आदर और सम्मान की कमी पाई जाती है I क्यूंकि दोनों स्वतंत्र है I

अगर महिला शादी से पहले साथ रहते हुए मां बन जाती है और पुरुष साथ बच्चे को अपनाने से मना कर दे तो बच्चे को अकेले संभालने की जिम्मेदारी के लिए महिला को तैयार रहना पड़ता है।

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लिव-इन-रिलेशनशिप के दौरान अगर संतान पैदा हो जाती है तो उनके परिवार उनको अपनाने में परेशानी महसूस करते है I और स्वयं बच्चा भी पारम्परिक पारिवारिक मर्यादाओं को समझने और अपनाने में असमर्थ होता हैं।  और समाज में भी उसको उपेक्षित महसूस कराया जाता है I

 ये तो हुए लिव-इन-रिलेशनशिप के लाभ और हानि I अब हम बात करते है की कोन लोग ज्योतिष के आधार इस लिव-इन-रिलेशनशिप में आते है I कुंडली में क्या योग होते है जिसके कारण लिव-इन-रिलेशनशिप जैसे रिश्ते में लोग आते है I

  1. कुंडली में पंचम भाव का स्वामी और सप्तम भाव स्वामी एक साथ हो ।
  2. कुंडली में पंचम भाव या सप्तम भाव में राहु या केतु स्थित हो या उनके स्वामियों से राहू केतु का सम्बन्ध हो I
  3. पंचमेश और सप्तमेश में राशि परिवर्तन योग हो I
  4. पंचमेश की उच्च राशि में राहु या केतु हो।
  5. सप्तम भाव तथा शुक्र पर शनि की और राहु की दृष्टि हो।
  6. चंद्रमा, लग्नेश तथा सप्तमेश लग्न या सप्तम भाव में हो।
  7. मंगल सप्तम भाव या लग्न में सप्तमेश के साथ या पंचम में पंचमेश के साथ हो।
  8. शुक्र, लग्न में लग्नेश के साथ या सप्तम में सप्तमेश के साथ हो।
  9. मंगल पंचम या नवम भाव में हो तथा सप्तमेश और एकादश भाव के स्वामी में राशि परिवर्तन हो।
  10. शुक्र, जन्म लग्न अथवा चंद्र लग्न से पंचम में हो।

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महेश के. शिवा www.ganeshavoice.in के मुख्य संपादक हैं। जो सनातन संस्कृति, धर्म, संस्कृति और हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतें हैं। इन्हें ज्योतिष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।
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