अनंत गुणों से भरपूर होता है पांच मुखी रुद्राक्ष, मिलते हैं ये फायदें

paanch mukhi rudrakshaवैदिक शास्त्रों के अनुसार पांच मुखी रुद्राक्ष साक्षात रुद्र का स्वरुप है। इसे कालाग्नि के नाम से भी जाना जाता है। रुधोजात्, तत्पुरुष, ईशान, अघोर तथा कामदेव शिव के ये पांचों रुप पंचमुखी रुद्राक्ष में वास करते हैं। पांच मुखी रुद्राक्ष को पंचमुख ब्रह्मा का स्वरुप माना जाता है, इनके पांच मुखों को भगवान शिव का पंचानन स्वरुप माना जाता है। मानव इस संसार में भी ज्ञानरुपी संपत्ति प्राप्त करता है वह सुस्पष्ट तथा स्थायी हो तभी उसकी सार्थकता है। इस तरह के ज्ञान की रक्षा के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष विशेष उपयोगी है। यह मनुष्य को उन्नति के रास्ते पर चलने की ताकत प्रदान करता है तथा उन्हें अध्यात्मिक सुख की प्राप्ति कराता है।

पंच मुखी रुद्राक्ष कालाग्नि रुद्र का प्रतीक माना जाता है। यह परस्त्री गमन के पाप को हरता है तथा इसे धारण करने से सभी तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे धारक को किसी भी तरह का दुख नहीं सताता है। इसके गुण अनंत हैं, इसलिए इसे अत्यधिक फलदायक तथा महिमामय माना जाता है। पंच मुखी रुद्राक्ष के कम से कम तीन अथवा पांच दाने धारण करने चाहिए।

पंचमुखी रुद्राक्ष – Paanch Mukhi Rudraksha

पंचमुखी रुद्राक्ष में भगवान शिव की सभी शक्तियां समाहित होती है। इस धरा के पंच तत्व और पांच पांडव इस रुद्राक्ष के देव माने गए हैं। इस रुद्राक्ष (Paanch Mukhi Rudraksha) का स्वामी ग्रह गुरु होता है। मान्यता अनुसार इस रुद्राक्ष के कम से कम तीन दाने धारण अवश्य करने चाहिए।

पंचमुखी रुद्राक्ष के फायदे (Benefits of Paanch Mukhi Rudraksha)

* इस रुद्राक्ष को धारण करने से मान सम्मान और धन की प्राप्ति होती है।
* यह रुद्राक्ष धनु और मीन राशि के जातकों के लिए शुभ होता है।
* यह सभी सिद्धियों की प्राप्ति और पापों से मुक्ति दिलाता है।
पंचमुखी रुद्राक्ष का मंत्र (Mantra of Panch Mukhi Rudraksha)
* पंच मुखी रुद्राक्ष का मंत्र “ऊँ ह्रीं नम:” है।

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छह मुखी रुद्राक्ष सात मुखी रुद्राक्षआठ मुखी रुद्राक्ष नौ मुखी रुद्राक्षदस मुखी रुद्राक्ष

ग्यारह मुखी रुद्राक्षबारह मुखी रुद्राक्षतेरह मुखी रुद्राक्ष चौदह मुखी रुद्राक्ष

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