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जीवन मंत्र

क्या कारण है विवाह Marriage के समय चावल व आम के पेड़ का

Marriage विवाह के समय अक्सर सभी ने देखा होगा कि विवाह व अन्य शुभ अवसर पर चावल व आम की पत्तियों के बंधनवार का प्रचलन काफी प्रचलित है। चावल का प्रयोग टीका करने के बाद माथे पर लगा दिया जाता है। आम की पत्तियों का बंदरबांट उस घर मे बांधा जाता है जंहा कोई शुभ कार्य हो रहा हो। हिंदुयों में बृक्ष(वृक्ष) पूजा क्यों, की शोध के समय एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया था।

 

चावल और आम की पत्तियों के बंदनवार का उपयोग किसी समय केवल कन्या (जिसका विवाह हो रहा है) के घर तक सीमित था। यंहा तक चावल केवल कन्या पर फेंका जाता था। है न अजीब बात?

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कारण।

चावल को धान कहते हैं और जब चावल की खेती की जाती है तो जंहा चावल बोया जाता है वंहा से कुछ समय बाद उसकी पौध आने पर उसे उखाड़ कर दूसरी जगह पर बोया जाता है, जंहा पौध धान का फल बनती है अर्थात चावल जंहा बोया जाता है वंहा फल नही देता बल्कि दूसरे स्थान पर फल देता है।

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हिन्दू व्यवस्था में कन्या जिस घर मे जन्म लेती है वंहा फल न देकर पति के घर जाकर फल देती है अर्थात संतान रूपी फल पति के घर देती है न कि पिता के घर मे। इसलिये चावल और कन्या का जीवन एक होता है।

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क्या कहते हैं पूजा (Puja) करते समय मिलने वाले संकेत ?

आम का बंदनवार भी कन्या के ही घर लगाया जाता है। आम एक ऐसा पेड़ है जिस पर पूरे पेड़ पर कभी सूखा नहीं आता। कुछ न कुछ पत्तियां हरी बनी रहती हैं। ये कन्या के घर पर बांधना कन्या को आशिर्वाद होता है कि तुम जिस नए जीवन मे जा रही हो वंहा कितना भी दुख, तकलीफ आये (पतझड) परंतु इतना सुख हर हाल में रहेगा कि तुम जीवन जी सको।

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महेश कुमार शिवा www.ganeshavoice.in के मुख्य संपादक हैं। जो सनातन संस्कृति, धर्म, संस्कृति और हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतें हैं। इन्हें ज्योतिष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।
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