love ganeshavoice.in Love Relation क्या कारण है जो प्रेम और प्रेम विवाह सफल नही हो पाता है ?
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Love Relation क्या कारण है जो प्रेम और प्रेम विवाह सफल नही हो पाता है ?

Love Relation  में आजकल ये समस्या बहुत तेजी से सामने आ रही है I इस समस्या से जूझने वालो में लगभग हर उम्र के लोग शामिल है I क्यूंकि प्रेम की, आकर्षण की कोई उम्र नहीं होती I प्रेम संबंधो के टूटने का क्या कारण है, क्यों सब कुछ अच्छा चलते चलते अचानक से सब गड़बड़ हो जाता है, इसका कारण है कुंडली में बनने वाले ग्रहों के योग I कुंडली में बनने वाले ग्रहों योग के कारण व्यक्ति प्रेम की और आकर्षित होता है और इन्हीं ग्रहों के द्वारा बनने वाले दुर्योग के कारण दिल भी टूटते हैं। प्रेम सफल नही हो पता है I प्रेम में या प्रेम विवाह में असफल होने के बहुत से कारण होते है जैसे की ज्योतिष के अनुसार :-

शुक्र व मंगल की स्थिति व प्रभाव प्रेम संबंधों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। यदि किसी जातक की कुण्डली में सभी अनुकूल स्थितियाँ होते हुई भी, शुक्र की स्थिति प्रतिकूल हो तो प्रेम संबंध टूटकर दिल टूटने की घटना होती है।

सप्तम भाव या सप्तमेश का पाप पीड़ित होना, पापयोग में होना प्रेम विवाह की सफलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। पंचमेश व सप्तमेश दोनों की स्थिति इस प्रकार हो कि उनका सप्तम-पंचम से कोई संबंध न हो तो प्रेम की असफलता दृष्टिगत होती है।

शुक्र का सूर्य के नक्षत्र में होना और उस पर चन्द्रमा का प्रभाव होने की स्थिति में प्रेम संबंध होने के उपरांत या परिस्थितिवश विवाह हो जाने पर भी सफलता नहीं मिलती। शुक्र का सूर्य-चन्द्रमा के मध्य में होना असफल प्रेम का कारण है।

पंचम व सप्तम भाव के स्वामी ग्रह यदि धीमी गति के ग्रह हों तो प्रेम संबंधों का योग होने या चिरस्थायी प्रेम की अनुभूति को दर्शाता है। इस प्रकार के जातक जीवनभर प्रेम प्रसंगों को नहीं भूलते चाहे वे सफल हों या असफल I

जन्मकुंडली में अगर पांचवा भाव अच्छा है अच्छे से हमारा मतलब पांचवे भाव, भावेश और कारक कुंडली में अच्छी स्थिति में है , उन पर कोई ख़राब प्रभाव नहीं है, पांचवे भाव पर शुभ ग्रहों की द्रष्टि है तो प्रेम सम्बन्ध बहुत अच्छे रूप से चलते है I

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परन्तु अगर कुंडली में पांचवा भाव ख़राब स्थिति में है मतलब की पांचवे भाव का स्वामी कुंडली के 6, 8, 12 भाव में चला जाये, पांचवे भाव में कोई पाप ग्रह स्थित हो जाये, या इस भाव पर पाप ग्रहों की द्रष्टि हो, या फिर पांचवे भाव का स्वामी अपने से बारहवे भाव में चला जाये तो प्रेम सम्बन्ध टूटने के योग बन जाते है I साथ ही साथ अगर कुंडली के पांचवे, सातवे, नौवे और ग्यारहवे भाव में शनि देव स्थित हो तो भी यही स्थिति बन जाती है I

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अचानक से पार्टनर की तरफ से बेरुखी का सा व्यवहार होने लगता है बहुत कोशिशो के बावजूद भी स्थिति सामान्य नहीं होने पाती I और हमारे मन में सैकड़ो सवाल उठने लगते है की आखिर ऐसा क्यों हो गया I

अब इसको साधारण तौर पर ऐसे समझते है की

जब हम किसी के साथ प्रेम सम्बन्ध में होते है या फिर किसी के साथ रिलेशन में होते है तो हम अपने पार्टनर से कुछ ज्यादा ही अपेक्षाए रखने लगते है I हम चाहते है की दूसरा व्यक्ति सिर्फ हमारे ही बात ही सुने , जब हम चाहते है हमसे बात करे , जैसे हम चाहे वैसे ही करे I ये बढती हुई अपेक्षाए ही हमारे प्रेम संबंधो में दरार आने का मुख्य कारण है I

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इससे बचने के लिए एक दुसरे को समझने की आवश्यकता होती है जो जैसा है उसको वैसा ही स्वीकार करे उनको बदलने का प्रयास ना करे I उनकी इच्छाओ का भी सम्मान करना चाहिए I आप अपनी फीलिंग्स शेयर करे , आपसी मुद्दों पर बात करे, भविष्य की प्लानिंग करे लेकिन अपनी बात एक दुसरे पर थोपे नहीं I हमने तो डिसिजन ले लिया , ऐसे बाते नहीं होनी चाहिए I समय के अनुसार जीवन में बदलाव होते रहते है तो हमे भी उनके अनुसार अपने को बदलना चाहिए I

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कुछ उपाय जो आपके प्रेम सम्बन्ध को बनाकर रखेंगे I

  1. प्रत्येक शुक्रवार को एक दुसरे को सफ़ेद फूल और मिठाई खिलाये I
  2. लाल गुलाब के फूल एक दुसरे को दे I
  3. लव स्टोन पहने I
  4. कुंडली के अनुसार पांचवे भाव का स्टोन पहने लेकिन ग्रह की स्थिति के अनुसार और किसी विद्वान ज्योतिषी की सलाह के अनुसार I
  5. अगर कुंडली में प्रेम का भाव अच्छी स्थिति में नहीं है तो उसके निवारण कराये I

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महेश के. शिवा www.ganeshavoice.in के मुख्य संपादक हैं। जो सनातन संस्कृति, धर्म, संस्कृति और हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतें हैं। इन्हें ज्योतिष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।
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