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क्या करती है शनि की साढ़ेसाती, और क्या उपाय करने चाहिए ?

कुछ लोग विपरीत परिस्थितियों में टूट जाते और कुछ लोग विपरीत परिस्थितियों में रिकॉर्ड तोड़ डालते है।

शनि की साढ़ेसाती का तात्पर्य उन साढ़े सात साल से है जब शनिदेव चंद्रमा की राशि से एक घर पहले से लेकर, चंदमा की राशि और फिर अगली राशि तक को पार नही कर लेते हैं। शनिदेव एक राशि में ढाई साल रहते है अतः 2.5×3=7.5 साल। कुछ लोग चंद्र की डिग्री से 45° पहले से लेकर 45° बाद तक को साढ़ेसाती मानते है जिसमे कई बार चंद्र से तीसरी या ग्यारहवीं राशि में शनिदेव के आ जाने से साढेसाती शुरू हो जाती है परंतु शास्त्रों में ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिलता है।

साढ़ेसाती समझना हो तो पहले ये तीन शब्द समझें:- पूर्वार्ध, मध्यार्ध और उत्तरार्द्ध।

शहद के इस उपाय से दूर हो जाएंगे शनि की साढ़ेसाती और मंगल दोष

पूर्वार्ध- किसी तीर को बीच से तोड़िये, जो आगे का नुकीला हिस्सा है वो पूर्वार्ध कहलाता है क्योंकि पूर्व अर्थात “पहले”..साढ़ेसाती के इस पहले चरण के ढाई साल को “पूर्वार्ध” कहा जाता है

मध्यार्ध- टूटे तीर के बीच के हिस्से को मध्यार्ध कहते है,मध्य अर्थात “बीच” का हिस्सा। ये साढ़ेसाती का दूसरा चरण कहलाता है इसमें शनिदेव चंद्रमा के ऊपर से गोचर करते है

“उत्तरार्द्ध- तीर का अंतिम हिस्सा जहाँ से बाण छोड़ा जाता है, यहाँ उत्तर का अर्थ है “बाद में”..जैसे उत्तरकालामृत या उत्तर रामायण, रामायण समाप्ति के बाद लव-कुश वाले हिस्से को उत्तर रामायण में दर्शाया गया। ये साढ़ेसाती का अंतिम चरण होता है,शनिदेव चंद्रमा की अगली राशि को पार करते है,पर स्मृतित रहे कि “वक्री” होने पर शनिदेव वापिस चंद्रमा की अगली राशि में आये तो फिर साढ़ेसाती कुछ महीनों के लिए लग जाती हैं

पूर्वार्ध में शनिदेव व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशान करते है, मध्यार्ध में आर्थिक, शारीरिक, विश्वास टूटना इत्यादि रूप से क्षति पहुंचाते है और उत्तरार्द्ध में शनि महाराज अपने कारण जो जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई करवाते है। यह वो समय होता है, जब व्यक्ति को “सत्य का ज्ञान” होता है।

क्या पैसा नही रुकता है, खर्च अधिक है तो क्या करे उपाय ?

बहुत से लोग कॉलेज लाइफ में अपनी महिला मित्र के साथ होटल में खूब मौज-मस्ती करते है,उन्हें असमय गर्भवती करके गर्भनिरोधक दवाईयां खिलाते है और इस बात से अनभिज्ञ रहते है कि दवाई से उनके गर्भाशय का क्या हाल होता है। कुछ वर्षों बाद वही जातक ज्योतिषियों के दर-दर भटकते है कि शादी को फलाने साल हो गये संतान नही हो रही, भाई ये शनिदेव की महिमा है, हर एक कर्म का हिसाब रखते है।

ठीक इसी तरह बीबी, बच्चों के साथ मायके गयी तो बहुत से “बरखुरदार” परायी स्त्रियों की मजबूरी का या आर्थिक सहायता के नाम पर उनसे अपनी शारीरिक भूख मिटाते है,उसमें भी कहीं वीडियो ना बन जाये तो कमरे में “अँधेरा” कर लेते है..अब इस दो टांग के चतुर प्राणी को कौन समझाये की अँधेरे के कारक ग्रह भी शनिदेव ही है”, ऐसा कोई भी गलत काम जो अँधेरे में हो जैसे किसी की लाचारी और मजबूरी का फायदा उठाना या बंद कमरे में हो जैसे- रिश्वत,घूसखोरी,मिलावट,जमाखोरी तो शनिदेव साढ़ेसाती में ऐसा रगड़वाते है की पीने को पानी तक नसीब नहीं होता है।

शनिदेव कुंडली में 6,8,10 और 12वे भाव के कारक ग्रह माने गये है। खैर साढ़ेसाती की सच्चाई जाननी हो तो आप 6वे और 12वे भाव से समझिये। छठा भाव “रोग-ऋण-शत्रु” और बारहवां भाव “जैल और अस्पताल”। यदि आप पता करो तो पाओगे की जैल में डालते वक़्त अपराधी से अँगूठी माला, कड़ा, ब्रेसलेट, बेल्ट आदि सब निकलवा लिया जाता है, वहीं अस्पताल में भर्ती मरीज या स्त्रियों को समझाऊ तो प्रसव के वक़्त महिला की अँगूठी, मंगलसूत्र और अन्य सोने के कंगन उतरवा लिए जाते है। ये Concept अच्छे से समझ लीजिए तभी आगे पढ़ने में आनंद आयेगा।

शनिदेव 12वे भाव के कारक होकर जब अपने पर आ जाते है तो ये नाग-नगीने और माला निरर्थक हो जाती है, सिर्फ आपके संचित कर्म ही काम आते है, कोई दिखावा नहीं चलता भैया शनिदेव के दरबार में।

क्यों करने चाहिए उपाय?

 

शनिदेव सभी व्यक्ति के लिए कष्टकारी नहीं होते हैं। शनिदेव की साढ़ेसाती में बहुत से लोगों को अपेक्षा से बढ़कर लाभ, सम्मान व वैभव की प्राप्ति होती है हालांकि कुछ लोगों को काफी परेशानीयो एवं कष्टों का सामना भी करना होता है। इस प्रकार शनिदेव केवल कष्ट ही नहीं देते बल्कि शुभ और लाभ भी प्रदान करते हैं। यदि चन्द्रमा उच्च राशि में हो तो अधिक सहनशक्ति आ जाती है और कार्यक्षमता बढ़ जाती है जबकि कमज़ोर व नीच का चन्द्र,केमुद्रम या विषयोग जनित चंद्र सहनशीलता को कम कर देता है व मन काम में नहीं लगता है,इससे समस्याएं और बढ़ जाती हैं। अतः जन्म कुण्डली में चन्द्रमा की स्थिति का आंकलन करने के साथ ही शनिदेव की स्थिति का आंकलन भी आवश्यक होता है।

उपाय

जितने पुण्य के काम करने हो या जो भी उपाय-टोटके वो सब साढ़ेसाती के पहले ही करने चाहिये। साढेसाती के वक़्त व्यवहार से सरल और नम्र बनना सीखिये,लोगो की आलोचना और बात काटने से बचें। साधारण-स्वच्छ कपड़े पहनिए और आडंबर व दिखावे से कोषों दूरी रखें।

शनिदेव एकमात्र वायुकारक ग्रह है सो सुबह और शाम एकांत में एकचित्त बैठकर कम से कम 20 मिनिट लंबी और शनै-शनै (धीमी) स्वास लीजिये और छोड़िए।

मैं अक्सर साढ़ेसाती वालों को मध्यार्ध के दौरान सलाह देता हूँ कि जितने ये नग-नगीने और मालाये पहनी है सब उतार दो…जैसे हो वैसे रहो,सिर्फ आदतों में सुधार लाओ। कुछ लोग बहुत अधिक सज्जन या महापुरुष होने का ढोंग करते है।शनिदेव दिखावे से बहुत रुष्ठ हो जाते है यही कारण है कि उनका लक्ष्मी जी से छत्तीस का आंकड़ा है।

यदि आप शराब नहीं पीते हो और साढ़ेसाती के कष्टों के कारण आप पीने लग गये हो तो शराब छोड़ देनी चाहिये क्योंकि ये कष्ट ही देगी परंतु यदि आप बहुत पहले से पीते हो और साढ़ेसाती आने पर छोड़ दो तो ये शुद्ध ढोंग कहलाता है,उल्टा ऐसे में आप और अधिक कष्ट में घिर जाओगे अतः जैसे हो वैसे ही रहो, मात्रा कम कर दे पर बंद नहीं।

बहुत से लोग साढ़ेसाती के वक़्त या भयंकर कष्ट/संकट आने पर हद से ज्यादा धार्मिक प्रवृत्ति के बन जाते हैं और ये बात भी नोट कर लीजिए कि जितना ज्यादा धार्मिक बनते है कष्टों की चोट उतनी ही पैनी होती जाती हैं। इसलिए कहता हूं भाई जैसे हो वैसे ही रहो, 2 अगरबत्ती और एक बार हनुमान चालीसा पढ़ना काफी है। पहले 2 अगरबत्ती लगाते थे साढ़ेसाती के वक़्त भी 4 के बजाय 2 ही लगाओ। बहुत अधिक पूजा पाठ करने से कोई कष्ट दूर नहीं होते है बल्कि इंसान मानसिक रूप से बैसाखी पकड़ लेता है।

“जमीन और प्रकृति” से जुड़िये, पेड़-पौधों की साँफ़-सफ़ाई और देखभाल को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बनाइये। समय-समय पर प्राकृतिक खाद पौधों में डालते रहे। अपने घर-मोहल्ले की और सड़क की सफ़ाई पर ध्यान दे,कभी सड़क पर कोई कचरा गिरा दिख जाये तो निःसंकोच उठाकर कहीं दूर कचराघर में फेंक दे या किनारे लगा दे।

शनिदेव की मकर राशि घुटनों को दर्शाती है,शनिदेव शुक्र की न्यायोचित तुला राशि में उच्च के होते हैं। जो लोग अपनी बीबी को रानी जैसे रखते है और वैसा व्यवहार भी करते है उनको साढ़ेसाती बहुत कम कष्ट देती हैं। बीबी के घुटने और पैर दबाने से आप कभी गौर किजियेगा की प्रत्यक्ष रूप से आने वाला कोई बड़ा संकट कब आया,किधर गया पता ही नही चलेगा। वैसे भी बॉस के आगे हाथपैर जोड़ने से तो अच्छा ही है बीबी के पैर दबा लो। महिलाये साढ़ेसाती में अपने पति के पैर दबाये और पति के रहते किसी को गुरु ना बनाये।

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महेश कुमार शिवा www.ganeshavoice.in के मुख्य संपादक हैं। जो सनातन संस्कृति, धर्म, संस्कृति और हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतें हैं। इन्हें ज्योतिष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।
http://ganeshavoice.in

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