Varaha avatar Story in hindi 1 1
ज्योतिष जानकारी धर्म दर्शन राशिफल

कब है वराह जयंती और भगवान विष्णु ने क्यों लिया इस रुप में अवतार : Varaha Jayanti 2021

Varaha Jayanti 2021 : वराह भगवान को भगवान विष्णु का ही एक अवतार माना गया है। भगवान विष्णु के दस अवतारों में यह उनका तीसरा अवतार है, जिनकी जयंती भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाई जाती हैं। इस साल यह पावन तिथि 9 सितंबर 2021 को पड़ने जा रही है।

Varaha avatar Story in hindi 1 1

जीवनसाथी की तलाश हुई आसान! फ्री रजिस्ट्रेशन करके तलाश करें अपना हमसफर

समस्या है तो समाधान भी है, विद्वान ज्योतिषी से फ्री में लें परामर्श

वराह जयंती का पर्व भगवान भगवान विष्णु के इस अवतार का जन्म उत्सव मनाने के लिए होता है। भगवान विष्णु के इस स्वरूप को उद्धारक देवता के रूप में जाना जाता है। वराह जयंती के दिन भगवान विष्णु के आधे सुअर और आधे मनुष्य रूपी अवतार की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

नाम के पहले अक्षर से जानिए कैसा है आपके लव पार्टनर का स्वभाव : love partner – 2

वराह जयंती से जुड़ी कथा
मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वराह रूप में अवतार दुनिया को बुरी शक्तियों से बचाने के लिए किया था। कहते हैं कि एक बार प्रलय के जल से पृथ्वी जलमग्न हो गई थी। ऐसी स्थिति में भगवान विष्णु की नासिका या नाक से भगवान विष्णु ने वराह के रूप में अवतार लिया था। मान्यता है कि ब्रह्मा जी की नाक से एक अंगूठे के आकार वाले वराह अवतार ने पलक झपकते ही पर्वताकार रूप धारण कर लिया था। उनकी गर्जना मात्र से दसों दिशाएं कांप गईं थी।

भगवान गणेश को भूलकर भी अर्पित न करें ये चीजें, नाराज हो जाते हैं गणपति 

इसके बाद सभी ऋषि-मुनियों, देवताओं, गंधर्वों आदि ने उनकी स्तुति करना प्रारंभ किया था। इसके बाद उन्होंने उन्होंने जलमग्न पृथ्वी को तलाशना प्रारंभ किया और जल के भीतर प्रवेश कर गए। जब वे पृथ्वी को अपने थूंथने के जरिए जल से बाहर निकालने लगे तो हिरण्याक्ष ने उन पर गदा से आक्रमण किया। इसके बाद भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध करने के पश्चात् अपने खुरों से जल को स्तंभित करके पृथ्वी को स्थापित किया।

आपको भी आ​ते हैं डरावने या बुरे सपने तो तुरंत करें ये उपाय : Swapna Shastra

वराह भगवान की पूजा विधि
वराह जयंती का पावन पर्व दक्षिण भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साधक प्रात:काल उठकर स्नान-ध्यान के बाद वराह अवतार की विधि-विधान से पूजा, जप एवं कीर्तन करते हैं।

आज से इन पांच राशि वालों को मालामाल करेंगे शुक्र ग्रह : shukra Gochar 2021

इस दिन भगवान वराह के मंत्र का जप मूंगे अथवा लाल चंदन की माला से जपने का विधान है। ऐसा करने पर भगवान वराह का शीघ्र ही आशीर्वाद प्राप्त होता है और भूमि-भवन से जुड़े सुखों की प्राप्ति होती है। नीचे दिये गये हुए मंत्र को जपते हुए शहद, शक्कर या गुड़ से 108 बार हवन करने से शीघ्र ही सभी मनोकामना पूरी होती है।

भगवान वराह का मंत्र
नमो भगवते वाराहरूपाय भूभुर्व: स्व: स्यात्पते भूपतित्वं देह्येतद्दापय स्वाहा।।

ज्योतिष के चमत्कारी उपाय, फ्री सर्विस और रोचक जानकारी के लिए ज्वाइन करें हमारा टेलिग्राम चैनल

Google News पर हमसे जुड़ने के लिए हमें यहां क्लीक कर फॉलो करें।

ज्योतिष, धर्म, व्रत एवं त्योहार से जुड़ी ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें और ट्वीटर @ganeshavoice1 पर फॉलो करें।

maheshshivapress
महेश के. शिवा www.ganeshavoice.in के मुख्य संपादक हैं। जो सनातन संस्कृति, धर्म, संस्कृति और हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतें हैं। इन्हें ज्योतिष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।
http://ganeshavoice.in