gochar 1 ganeshavoice.in क्या होता है ग्रहों का गोचर और मानव जीवन पर पड़ता है क्या प्रभाव : Gochar
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क्या होता है ग्रहों का गोचर और मानव जीवन पर पड़ता है क्या प्रभाव : Gochar

Gochar : अक्सर आपने सुना होगा और विभिन्न समाचार पत्रों तथा ​अन्य मीडिया प्लेटफार्म पर भी पढ़ा होगा कि ग्रहों का गोचर Gochar हो रहा है और इस गोचर Gochar से मानव की राशि अथवा जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। आज हम इस आर्टिकल में इसी बात पर चर्चा करेंगे कि गोचर क्या होता है और इसका हमारे जीवन पर क्या असर पड़ता है।

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ज्योतिष शास्त्र में ग्रह गोचर Gochar शब्द अक्सर सुनने को मिलता है। यहां गोचर का सीधा मतलब ग्रह की चाल से है। ग्रह का राशि परिवर्तन (एक राशि से दूसरी राशि में जाना) गोचर कहलाता है।
ज्योतिष में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु नौ ग्रह हैं।
ये गृह गोचर अपनी गति के अनुसार समय-समय पर राशियां बदलते हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में ग्रहों के गोचर का बहुत प्रभाव पड़ता है। सूर्य से लेकर केतु तक सभी ग्रहों के राशि परिवर्तन का अवधि अलग-अलग होती है। आईए जानते हैं ग्रहों का गोचर क्या फल देता है :-

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सूर्य का गोचर :-
राशि स्वामी- सिंह राशि
कारक- आत्मा का कारक
गोचर का शुभ फल- लग्न राशि से तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल देता है!

चंद्रमा का गोचर :-
राशि स्वामी- कर्क राशि
कारक- मन का कारक
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से पहले, तीसरे, सातवें, दसवें, और ग्यारहवें भाव में शुभ फल।
गोचर का अशुभ फल- चौथे, आठवें और बारहवें भाव में अशुभ परिणाम प्राप्त होता है।

मंगल का गोचर :-
राशि स्वामी- मेष और वृश्चिक
कारक- ऊर्जा, साहस और बल
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल देता है।

बुध का गोचर :-
राशि स्वामी- मिथुन और कन्या राशि का स्वामी
कारक- बुद्धि, तर्कशास्त्र, संवाद का कारक
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से दूसरे, चौथे, छठे, आठवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में गोचर का अशुभ फल- शेष भावों में परिणाम अच्छे नहीं मिलते।

गुरु का गोचर :-
राशि स्वामी- धनु और मीन राशि का स्वामी
कारक- ज्ञान, संतान एवं परिवार का कारक
गोचर का शुभ फल- दूसरे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल देता हैं।

शुक्र का गोचर :-
राशि स्वामी- वृषभ और तुला राशि का स्वामी
कारक- प्रेम, रोमांस, सुंदरता और कला
गोचर का शुभ फल- पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें, आठवें, नौवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव में शुभ फल।
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल देता है!

शनि का गोचर :-
राशि स्वामी- मकर और कुंभ राशि का स्वामी
कारक- कर्म का कारक
गोचर का शुभ फल- तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल देता है।

राहु का गोचर :-
राशि स्वामी- कोई नहीं ( छाया ग्रह)
कारक- चतुरता, तकनीकी और राजनीति
गोचर का शुभ फल- तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है।
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल देता है।

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केतु का गोचर :-
राशि स्वामी- कोई नहीं ( छाया ग्रह)
कारक- वैराग्य, आध्यात्म और मोक्ष
गोचर का शुभ फल- लग्न राशि से पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल – बाकी भाव में अशुभ फल देता है।

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महेश के. शिवा www.ganeshavoice.in के मुख्य संपादक हैं। जो सनातन संस्कृति, धर्म, संस्कृति और हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतें हैं। इन्हें ज्योतिष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।
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