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श्री कालभैरव जी और शराब की कुछ बढ़िया रोचक जानकारी

जैसा कि सर्वविदित है कि सृष्टि के संतुलन के लिए हर छोटी से छोटी चीज का अपना अहम योगदान है,परम परमात्मा ने हर जीव और वस्तु बहुत सोच समझकर बनायी है। कोबरा का जहर सैकड़ो की जान हर सकता है तो वही “जहर” एन्थसेसथिया जैसे इंजेक्शन की औषधियों में भी काम आता है। आज हम आपको “शराब” के कुछ बढ़िया रोचक तथ्य बताने जा रहे है:-

किस कार्य के लिए कौन से रंग का प्रयोग करे जिससे जीवन खुशहाल हो, एक विशेष आर्टिकल ?

“मध्यप्रदेश” के “उज्जैन” में स्थित है “कालभैरव मंदिर” में प्रतिमा को शराब पीलाने का सिलसिला सदियों से चला आ रहा है। कालभैरवजी, शिवजी के ही तामसिक अवतार माने गये हैं यह मंदिर लगभग 6000 साल पुराना माना जाता है। यह एक “वाममार्गी तांत्रिक मंदिर” है। वाम मार्ग के मंदिरों में माँस, मदिरा, बलि, मुद्रा जैसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। प्राचीन समय में यहाँ सिर्फ तांत्रिकों को ही आने की अनुमति थी जो यहाँ तांत्रिक क्रियाएं करते थे और कुछ विशेष अवसरों पर कालभैरव को मदिरा का भोग भी चढ़ाया जाता था। कालांतर में ये मंदिर आम लोगों के लिए खोल दिया गया, पहले यहां जानवरों की बलि चढ़ाने के बाद बलि के मांस के साथ-साथ भैरव बाबा को मदिरा भी चढ़ाई जाती थी। अब बलि तो बंद हो गई है, लेकिन बाबाजी ने मदिरा का भोग स्वीकारना अभी भी जारी रखा है।

वर्तमान में हम “शराब” की एक घिनौने और असामाजिक नजरिये से देखते है क्योंकि पुरुषों ने भी शराब सेवन की अति कर रखी है। शराब ना सिर्फ एक औषधी है बल्कि इसके ज्योतिषीय उपाय भी बहुत प्रचलित है:-

क्या करती है शनि की साढ़ेसाती, और क्या उपाय करने चाहिए ?

आजकल बाजार में सर्दी-खाँसी की लेकर तमाम आकर्षक कवर वाली कफ़-सिरप मौजूद है पर आप कभी अपने बुजुर्गों से पूछना या ग्रुप के ही अन्य तजुर्बेकार लोग जानते होंगे कि छोटे बच्चों को सर्दी होने पर 1 चम्मच “ब्रांडी” पिलाने से बढ़िया और कोई दवाई नहीं है। “Alcohal” में राहू और मंगल की “गर्मी” होती है जो चंद्रमा द्वारा प्रदत्त अतिरिक्त सर्दी को Dilute कर मल मूत्र के मार्ग से बाहर कर देता है I

हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी आती है जिसे “कालाष्टमी” कहते हैं, कार्तिक/मार्गशीर्ष माह की कालाष्टमी किसी भी “शत्रुपीड़ा” दूर करके के उपाय हेतु सर्वश्रेष्ठ मानी गयी है, ये जो उपाय बता रहा हूँ वो तभी किजियेगा जब आप बिल्कुल बेकसूर हो और सामने वाला जानबूझकर आपको कष्ट दे रहा हो..आपको घड़े के ऊपर रखे जाने वाला मिट्टी का ढक्कन चाहिये या मिट्टी की प्लेट..उसमें आप “डॉक्टर ब्रांडी” उढेल दे, Dr. Brandi ही क्यों, कारण शराब में अल्कोहल की मात्रा सबसे अधिक ब्रांडी में ही होती है और ये ज्यादा महँगी भी नही होती है..अब आप कालाष्टमी (तारीख पर नही, तिथि पर ध्यान दीजियेगा) के राहूकाल या सूर्यास्त के बाद मिट्टी के पात्र में शराब उढेल कर उसमे अपना चेहरा ध्यान से देखे (छायादान), 1 मिनिट बाद वो शराब वाला पात्र किसी भैरव मंदिर में प्रतिमा के पास छोड़ दे, मंदिर न हो तो घर के पास किसी नाली में उढेल दे, या वाशबेसिन में डालकर पानी शुरू कर दे। इस उपाय से राहू, छल-प्रपंच से शनि (न्यायिक प्रकिया) की सहायता से आपके शत्रुओं को वो हाल करेगा कि आप यकीन नहीं कर पाओगे, आपके शत्रु का भीषण एक्सीडेंट या फिर उनको 3-6 महिने की जेल यात्रा भी हो सकती है

कभी आपका “श्री कालभैरवजी मंदिर” जाना तय हुआ और आप ज्योतिषीय उपाय भी चाहते हो तो अपने ग्रहों के अनुसार भी शराब का भोग लगा सकते हो। कभी भी मंदिर परिसर की शराब नहीं खरीदे क्योकि वो 99% नकली ही होती है अतः शहर के स्टेशन के पास के किसी शराब की दुकान से ही शराब खरीदें। यदि आप ज्योतिषी पर यकीन नही करते हो तो कोई भी शराब चढ़ा सकते हो। ज्योतिषीय उपायों अनुसार:-

कैसे प्रेम विवाह के रास्ते की सारी बाधाएं दूर होंगी ?

  1. सूर्य देव और बुधदेव के कष्टों से बचने के लिये कालभैरवजी को महँगी स्कॉच श्रद्धानुसार अर्पित करें।
  2. चंद्र के लिये शराब के बजाय सादा प्रसाद चढ़ाये और मंदिर के पास बैठे पंडित जी को पीने के लिये ठंडे पानी की बोतल छोड़ दीजिए।
  3. मंगल के लिये Rum या Red Wine का भोग दे।
  4. गुरु के लिये आप शराब ना चढ़ाकर केशर के पेढ़े का भोग लगाएं।
  5. शुक्र के लिये आप Vodka Gin” या “White Rum” का भोग लगाये।
  6. शनि राहू केतु के कष्टों से बचने के लिए आप देसी दारू, ब्रांडी या रम का भोग लगाये।

आप कहोगें की मैंने शराब का भी बटवारा कर दिया तो मित्रों शराब में उपस्थित “Content और Component” का बारीकी से अध्ययन करके ही ये लेख लिखा हूँ जैसे भगवानों को अर्पण हेतु भी दूर्वा , धतूरा, पुष्पों का बटवारा हुआ है ठीक वैसे ही।

क्या पैसा नही रुकता है, खर्च अधिक है तो क्या करे उपाय ?

कुछ बुद्धिजीवी वर्गविशेष के लोग पूछ भी सकते है कि “शास्त्रों में शराब के वर्गीकरण का उल्लेख कहाँ है ?” तो भाई, शास्त्रों में तो इसका भी उल्लेख नहीं है कि किसी की पोस्ट या लेख पर आकर उछलकूद कर पोस्ट खराब करो, साथ ही स्वंय का और सामने वाले का समय व्यर्थ करो। लेख पसंद आये तो धन्यवाद, ना पसंद आये तो दो गज की लंबी दूरी से ही “जय महाकाल”

“ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:”

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महेश के. शिवा www.ganeshavoice.in के मुख्य संपादक हैं। जो सनातन संस्कृति, धर्म, संस्कृति और हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतें हैं। इन्हें ज्योतिष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।
http://ganeshavoice.in

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