bholenath 1
रावण संहिता

मृत्यु के सबसे बड़े 8 संकेत, जो भोलेनाथ ने माता पार्वती को बताए थे

मृत्यु के सबसे बड़े 8 संकेत : आज हम बात करेंगे मृत्यु के उन आठ संकेतों के बारे में, जो इंसान को पहले से ही अनुभव होने लगते हैं। रावण संहिता के अनुसार भोलेनाथ ने माता पार्वती को इन आठ संकेतों की जानकारी दी थी। astrology । free astrology । free astrology consultation ।

bholenath 1

भगवान विष्णु कहते हैं कि मृत्यु का संबंध मनुष्य के शरीर से है उसकी आत्मा से नहीं। शिव पुराण के अनुसार एक बार देवी पार्वती ने भगवान शिव से पूछा क्या कोई ऐसे संकेत होते हैं जिससे यह पता लग जाए कि मनुष्य की मृत्यु होने वाली है? या मनुष्य की मृत्यु निकटस्थ है। भगवान शिव ने कहा अवश्य देवी और वे देवी पार्वती को बताने लगे…

समस्या है तो समाधान भी है, फ्री में करें विद्वान ज्योतिषी से बात

1. भगवान शिव के मुताबिक जब व्यक्ति के तन का रंग हल्का पीला पड़ने लगे या सफेद व थोड़ा सा लाल पड़ने लगे तो यह इस ओर इशारा करता है कि व्यक्ति की मौत अगले 6 महीने के अंतराल में होने वाली है।

2. जब कोई व्यक्ति अपने प्रतिबिंब को पानी, तेल और सीसे में देखने में असमर्थता महसूस करने लगे तो यह इस ओर इंगित करता है कि व्यक्ति की मौत अगले 6 महीनों के अंतराल में होने वाली है।

3. जो लोग अपनी वास्तविक उम्र से ज्यादा जीते हैं उन्हें उनकी छाया दिखाई नहीं देती और जिन्हें दिखाई देती है उन्हें धड़ रहित छाया दिखाई देती है। जो भयभीत करने वाली होती है।

4. जब किसी इंसान के बाएं हाथ में अजीब तरह की मरोड़ आने लगे और यह मरोड़ एक हफ्ते से ज्यादा तक जारी रहे तो समझ लीजिए वह इंसान एक महीने से ज्यादा नहीं जिएगा।

5. जब किसी इंसान को यह महसूस होने लगे कि उसका मुंह, जीभ, आंखे, कान और नाक पत्थर की होती जा रही हैं तो उसक व्यक्ति की अगले 6 माह के बाद मृत्यु निश्चित होती है।

6. जब कोई व्यक्ति चंद्रमा, सूर्य व अग्नि के प्रकाश को देखने में असमर्थता महसूस करने लगे तो यह बताता है कि वह व्यक्ति 6 महीने में मर जाएगा।

7. अगर व्यक्ति की जुबान में सूजन आ जाए और उसके दांतों से पस बहने लगे तो यह बताता है कि व्यक्ति 6 महीनें से ज्यादा नहीं जिएगा।

8. जब व्यक्ति को सूर्य, चंद्रमा और आसमान सिर्फ लाल नजर आने लगे तो यह बताता है कि व्यक्ति अगले 6 महीनों में मर जाएगा।

शिव के पार्वती को दिए गए वक्तव्य के अलावा पुराण भी मृत्यु के विषय में बहुत कुछ कहते हैं। यह भी सत्य है कि पुरातन काल से मानवों और राक्षसों ने भगवान को खुश करके मृत्यु पर विजय प्राप्त करने की भरकस कोशिश की है, लेकिन वे यह करने में कामयाब नहीं हो पाए…क्योंकि धरती पर जीवन का मृत्यु ही एक मात्र सत्य है।

maheshshivapress
महेश कुमार शिवा www.ganeshavoice.in के मुख्य संपादक हैं। जो सनातन संस्कृति, धर्म, संस्कृति और हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतें हैं। इन्हें ज्योतिष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।
http://ganeshavoice.in