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जन्म कुंडली के आठवे भाव के अतिकष्ट्कारी राहू Rahu का रामबाण उपाय

Rahu ज्योतिषी के पास जब भी कोई जातक आता है तो जातक को इस बात से कुछ लेना-देना नही होता है कि ज्योतिषी कुंडली वैदिक पद्धति से देख रहे है या KP / लालकिताब / जैमिनी / नाड़ी आदि…या हस्तरेखा या अंकगणित से, उन्हें तो बस उनकी समस्या का समाधान चाहिये, ये ज्योतिष जगत का एक अंतिम कटु सत्य है।

 

अष्टम में राहू से अधिक बुरे फल शायद ही कोई और ग्रह देता हो क्योकि पाँचवी दृष्टि बारहवे भाव में तो खर्चीला, कामी, नींद में दिक्कत, अस्पताल / कोर्ट-कचहरी के चक्कर आदि। सप्तम से दूसरे भाव को देखना मतलब घर के लिए कितना भी करे पर कभी उसे तारीफ नसीब नही होगी, घर के धन पर अपनी नजर रखने वाला और नवी दृष्टि से सुख-चैन, भौतिक सुविधाओ में व्यवधान उत्पन्न होना।

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शनि मजदूरों का प्रतिनिधित्व करता है जबकि राहू उससे एक पायदान नीचे कचरा उठाने वाले, गटर साँफ करने वाले या टॉयलेट धोने वालों का प्रतिनिधित्व करता है। कालपुरुष की कुंडली में अष्टम भाव ठहरे और गंदे पानी को दर्शाता है, जहाँ बिच्छू, साँप और कीड़े-मकोड़े वास करते हैं।

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एक चीज आप कभी नोटिस करना कि जितने भी निम्नस्तर दर्जे के शराबी होते है, जो सड़क या जहाँ जगह मिले जैसे बस स्टैंड, वहाँ सो जाते है…99% उनका मुँह नजदीक आसपास की नाली/गटर के तरफ ही होता है, क्यों ? उसका कारण ये है कि जब भी शराब बनाई जाती है तो पहले गेंहू या किसी भी अनाज को सड़ाया जाता है जिससे अनगिनत कीड़े जन्म लेते हैं, पर बादमे दारू बनाते समय भट्टी पर सेकते समय सभी कीड़ों की दर्दनाक मौत होती है अब स्वंय सोचे कोई आदमी शराब पियेगा तो क्या कीड़े-मकोड़ो की आत्मा उसे याद नहीं करेगी, यही कारण है कि निम्नस्तर के शराबी का मुँह गटर के तरफ होता है।

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अष्टम में राहू हो तो जातक को बुधवार या शनिवार से शुरू करके किसी नाले या गटर के पास जाकर एक मिट्टी के बर्तन (छोटी प्लेट के बराबर जिससे घड़ा ढाका जाता है) में देसी दारू या रम डालकर उसमे छायादान करके (कम से कम 1 मिनिट आँखों की पुतलियां देखे), फिर उस दारू को किसी नाले/गटर में उड़ेल दे। मिट्टी का पात्र वही छोड़ दे। जगह उपलब्ध न हो तो वाशबेसिन में भी डाल सकते हो और मिट्टी का पात्र घर के बाहर फेंक दी। मिट्टी का ढक्कन उपलब्ध न हो रहा हो तो आप प्लास्टिक का बड़ा ढक्कन के सकते हो। ये उपाय आप 5 बुधवार या 5 शनिवार लगातार करें। इस उपाय से राहू आपका ठंडा पड़ जायेगा। उपाय के बाद पैर अवश्य धोये, खैर अष्टम राहू वालो को घर आते साथ सबसे पहले पैर धोने ही चाहिये।

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महेश के. शिवा www.ganeshavoice.in के मुख्य संपादक हैं। जो सनातन संस्कृति, धर्म, संस्कृति और हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतें हैं। इन्हें ज्योतिष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।
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