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क्या सम्बन्ध है नमक, शनिदेव और ज्योतिष में

ज्योतिष” को खंगालोगे तो आपको “विज्ञान” मिलेगा और विज्ञान को खंगालोगे तो आपको ज्योतिष मिलेगा। हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा दी गयी सभी वैदिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय जानकारियां आपस में कड़ियों की तरह जुड़ी हुई है, बस जरूरत है तो उसे समझ पाने की। आज मैं आपको “नमक” और “दुख-आलस्य” के कारक “शनिदेव” के बारे में कुछ रोचक जानकारी देने जा रहा हूँ।

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शास्त्रों में वर्णित है कि प्रातः “सूर्योदय” से पहले “स्नान” करना स्वास्थ्य और शरीर के तेज के लिए अतिउत्तम होता है और ये विज्ञान भी मानता है। दिनभर “परिश्रम” करने से शरीर में पसीने के रूप में नमक बाहर आता है, और शनि शरीर पर प्रकट होते है। सूर्य और शनि “पिता-पुत्र” होते हुए भी एक-दूसरे के शत्रु हैं। इसलिए सूर्य उदय के पूर्व स्नान करने से शनि हमारे शरीर से उतर जाते है एवं जब सूर्य देवता शनिविहिन मनुष्य को देखते है तो “तथास्तु” कहकर अपनी कृपा का पात्र बनाते हैं। दूसरी ओर शनि को भी सूर्य की किरणों से जलना नहीं पड़ता है इसलिए वह भी “तथास्तु” कहकर ऐसा करने वाले व्यक्ति को अपनी कृपा का पात्र बना लेते हैं।

यही कारण है कि आयुर्वेद में भी शरीर को खुरदुरे तौलिए से रगड़ने के बाद नहाने को कहा जाता है क्योंकि इससे रोमछिद्र खुल जाते है और उनके अंदर जमा नामक आसानी से बाहर निकल जाता है।

शरीर में से जब भी आपका पसीना(नमक) बाहर निकलता है तो आपका शरीर आलस्य(शनि) त्यागता है। आप सुबह उठकर कसरत-व्यायाम करते हो, दौड़ते-भागते हो तो आपके सूर्य और मंगल दोनों एक्टिव हो जाते है, ये दोनों गर्म ग्रह है अतः अपने Anti-ग्रह, शनिदेव को पसीने के रूप में बाहर कर देते हैं। किसान-मजदूर या जितने भी लोग शारीरिक मेहनत वाला कार्य धूँप करते है, उनमें आपको आलस्य की मात्रा ना के बराबर मिलेगी। जिम जाने वालों में भी, पर यहाँ मैं Non-AC जिम (व्ययामालाय) की बात कर रहा हूँ जहां शरीर पसीना फेंकता है,वातानुकूलित जिम तो बस अमीरों के चोचले है।

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आपने कभी नोट किया है कि साल के पूरे 365 दिन कार्य करने वाली हमारे परिवार की “महिलाये” हमेशा एक्टिव क्यों रहती है या उनका आलस्य कैसे खत्म हो जाता है..महिलाओ को “पवित्र” इसलिए माना जाता है क्योंकि पुराने जमाने में महिलाओं की “अग्नि_परीक्षा” होती थी, आज भी तो वहीं हो रहा है, रोटियां सेकते वक़्त तो रोज उनकी अग्नि परीक्षा होती है और किचन की गर्मी उनके आलस्य को पसीने के रूप से बाहर करती रहती है इसलिए वो हमेशा “सक्रिय और अनुशाषित” रहती हैं। वही दूसरी और जो बच्चियां घर में खाना नहीं बनाती वो आपको अधिकतर आलसी मिलेगी।

गर्मियों में बस में आपको नींद नहीं आती या रात को बिजली गुल होते ही नींद खुल जाती है, सोचा है क्यों.. क्योकि शरीर आलस्य (पसीना) त्यागने लगता है।

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किसी प्रियजन के परिवार के सदस्य की मृत्यु पर जाना होता है वो वहाँ सभी “रोते” है, सब लोग उनको ढाँढस बँधाते है पर रोने को मना नहीं करते है..”आँसू” में भी नमक होता है और शनिदेव को कालपुरुष का “दुःख” कहा गया है सो रोने से दिल हल्का होता है और “दुःख-दर्द” दूर होते है। आपके भी बच्चें जब उच्चशिक्षा हेतु शहर के बाहर बोरिया-बिस्तर समेटकर जाने को होते है तो आँखों में आँसू आ जाते है,तब भी पति अपनी पत्नी को ढाँढस बंधाता है और थोड़े देर रोने देता है।

जुडो-कराटे और अन्य स्पोर्ट्स वाले शारीरिक तौर पर काफी सक्रिय होते है और उनमें भी आलस्य ना के बराबर देखने को मिलता है। “हड्डियों” के कारक ग्रह “सूर्यदेव” है, आपने सुना होगा कि “जुडो-कराटे” वाले खिलाड़ी या अन्य स्पोर्ट्स वाले नमक नहीं खाते हैं या बहुत कम खाते है क्योंकि नमक हड्डियों को गलाता है। वैसे भी सफ़ेद रंग की दोनों चीजों शक्कर और नमक को आयुर्वेद में जहारतुल्य माना गया है।

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अतः शनिदेव को प्रसन्न करने हेतु शरीर से पसीने का त्याग करते रहें। अब पसीना “शारीरिक कष्ट” से आना चाहिए ये भी ध्यान दे, कई बार “शारीरिक सुख” प्राप्त करने के दौरान भी पसीना आता है पर वो मात्र थकान दूर करता है..आलस्य नहीं।

आपने एक चीज और देखी होगी कि दिन में दो बार नहाने वालों में आलस्य बहुत कम होता है उसका भी यहीं कारण है। सूर्य को हमारे शरीर का दायां नेत्र कहा गया है और चंद्र को बाया नेत्र, रात को काफी वक्त मोबाइल पर बिताने के बाद हम थककर सो तो जाते है पर सुबह फ्रेश फील नही करते है, उसके लिए आप रात को मोबाइल प्रयोग करना बंद करके देखे साथ ही सोने के पहले स्नान कीजिये फिर अगली सुबह और सारा दिन कैसे स्फूर्ति के साथ बीतेगा, बता दीजियेगा।

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महेश के. शिवा www.ganeshavoice.in के मुख्य संपादक हैं। जो सनातन संस्कृति, धर्म, संस्कृति और हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतें हैं। इन्हें ज्योतिष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।
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